जीवन की ओर
हम शरीर, मन और आत्मा का संगम हैं। शरीर और मन को झुकाने हम चेतना, आत्मा के तल पर आ सकते हैं और खुद को जान सकते हैं। और दुखों से पार हो सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि शरीर और मन को कहां झुकाएं। शरीर और मन को हम वहां झुका सकते है जहां हम चाह कर भी कुछ भी ना दे सकें और हमारा अंहकार पैदा ना हो सके। जैसे सुरज, चांद, पृथ्वी, प्रकृति, माता–पिता, यह सब सदैव हमें देते ही रहते हैं, पर बदले में हम उन्हें कुछ भी नही दे सकते।
स्वस्थ शरीर ही होना खुशहाल जीवन के लिए अनिवार्य है। इसके बिना आप अच्छे ओर सुन्दर जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। अगर आप स्वस्थ हैं तो जीवन की सभी परिस्थिति का आनंद ले सकते हैं। प्रकृति ने हमें सुंदर शरीर प्रदान किया है, हमारा प्रथम कर्तव्य हैं की हम शरीर को हर अवस्था में स्वस्थ रखें और प्रकृति के नियमों का पालन करके हम अपने शरीर को स्वस्थ ओर ऊर्जावान सुन्दर बना सकते हैं।
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